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Monday, April 28, 2014

क्या नए इलैक्ट्रोनिक गैजेटों की वजह से हो सकती है विमान दुर्घटना

क्या नए इलैक्ट्रोनिक गैजेटों की वजह से हो सकती है विमान दुर्घटना 

 

क्या सैंकडों की संख्या में हवा में उड रहे यात्री जहाजों में से अधिकतर काफी पुराने हो चुके हैं और नए और आधुनिक गैजेटों की वजह से उन्हें कोई खतरा हो सकता है? क्या विमान यात्रा के दौरान गैजेटों का इस्तेमाल करने से हवाई दुर्घटना हो सकती है?

2003 को न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च में एक विमान हवाई अड्डे पर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. जाँच के दौरान पता चला कि दुर्घटना के समय पायलट अपने मोबाइल फोन से अपने घरवालों के साथ बात कर रहा था.

2007 को अमेरिका में बोइंग 737 उडा रहे एक पायलट ने पाया कि विमान का नेविगेशन सिस्टम बंद हो गया है. परिचारिका ने यात्रियों की जाँच की तो देखा कि एक यात्री अपने जीपीएस यानी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम का उपयोग कर रहा है. परिचारिका ने उससे निवेदन किया कि वह उसे बंद कर दे. यात्री ने अपना गैजेट बंद कर दिया और विमान का नेविगेशन सिस्टम सुचारू ढंग से चलने लगा.

ऐसे ही कई और उदाहरण सामने आए हैं, जब विमान यात्रा के दौरान गैजेटों का इस्तेमाल करने से विमान  की मशीनों में व्यवधान उत्पन्न हुआ है.

डेली मेल की खबर के अनुसार अधिकतर डिवाइज़ सिग्नल प्रसारित करते हैं और साथ ही साथ इलैक्ट्रोमैगनेटिक तरंगे भी प्रवाहित करते हैं. ये तरंगे विमान के इलैक्ट्रोनिक सिस्टम के साथ छेडछाड कर सकती हैं. पुराने हो रहे विमानों में नए गैजेटों के द्वारा प्रसारित हो रही तरंगो से बचाव की तकनीकें उपलब्ध नही है, और ना ही इस बारे में कोई व्यापक शोध की गई है.

ब्रिटेन से सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ ह्यूज के अनुसार आज के जमाने में गैजेटों की तकनीकें हर सप्ताह बदल जाती है जबकि विमान की तकनीक 20 वर्ष तक भी नहीं बदलती ऐसे में सामंजस्य स्थापित कर पाना कठीन होता है.

अभी तक इस प्रकार का कोई सर्वे नहीं किया गया है कि किस प्रकार के गैजेट की वजह से विमान में किस प्रकार का व्यवधान उत्पन्न हो सकता है. परंतु इसकी आवश्यकता है, वह भी जल्दी.

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